My first Diwali away from home ....
दिवाली की वोह रात
अपनो से दूर सब को याद कर लेता हूँ |
मन ही मन सबसे बात कर लेता हूँ |
पापा के साथ पटाके खरीद लेता हूँ |
उनका कुरता पहन पटाके फोड़ लेता हूँ |
माँ के साथ पूजा कर लेता हूँ |
उसके हाथ की कचोड़ियाँ मूंह में भर लेता हूँ |
उसके साथ चुप के मिठाई खा लेता हूँ |
दादा दादी से पैसे ले लेता हूँ |
उनके आशीर्वाद से सो वर्ष जी लेता हूँ |
पापा के साथ पटाके खरीद लेता हूँ |
उनका कुरता पहन पटाके फोड़ लेता हूँ |
माँ के साथ पूजा कर लेता हूँ |
उसके हाथ की कचोड़ियाँ मूंह में भर लेता हूँ |
बहन को पटाखौॅ से डरा लेता हूँ |
दादा दादी से पैसे ले लेता हूँ |
उनके आशीर्वाद से सो वर्ष जी लेता हूँ |
बुआ के साथ हरयाणवी बोल लेता हूँ |
उसके साथ अपने लिए लड़की ढूंड लेता हूँ |
मामा के सीर पे चढ़ लेता हूँ |
उनकी सुपारी छुपा लेता हूँ |
दोस्तोँ के साथ घूम लेता हूँ |
सारे किस्से याद कर लेता हूँ |
यादोँ की लड़ियो से यह सूनी दिवाली की रात बरात कर लेता हूँ |
पल पल की इन यादोँ से एक पल और जी लेता हूँ |
7 comments:
nostalgic!
yeah was really nostalgic ... first diwali not in India :P
dude we were with you on Diwali! you back-stabber :P
@DD no you moron we didn't know each other that well ... om kahin ka
oh ya thats true but we did go to the temple together. anyways hope there are no more lonely days for you in SB, or elsewhere
I am sure there wont be any ..... as long as I have oxymoronic friends like you
new post.... new post!!
the readers demand a new post :P
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